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जानकारी 

हकलाहट क्या है?

यदि बोली के सामान्य प्रवाह मे किसी प्रकार की बाधा आती हो, तो उसे हकलाना कहते है। इसके कई प्रकार हो सकते है जैसे कि मानसिक रुकावट होना, झिझक होना, किसी शब्द को बोलने मे अधिक समय लगाना, सामान्य से अधिक खींचकर बोलना, अनावश्यक दबाव देकर बोलना, इत्यादि। सामान्य बोली के प्रवाह मे कई प्रकार की बाधाएँ आ सकती है जैसे कि सुनाई पडनेवाले रुकावटें, निःशब्द रुकावटें, आवाज़ का दोहराना, शब्दांश का दोहराना, आवाज़ का विस्तार, उत्तेजित हो कर बात करना, टूटे-फूटे शब्द बोलना, शब्दों को अत्यधिक तनाव के साथ उच्चारण करना, इत्यादि।

हकलाहट के दौरान होनेवाली ज़्यादातर परेशानियाँ 60%-70% एक जैसी होती है। फ़िर भी किसी भी दो लोगों की हकलाहट एक सा नही होता है। हकलाहट कभी कम होता है तो कभी ज़्यादा, कुछ लोगों के सामने होती ही नही है और कभी एक शोब्द बोलना भी कठिन हो जाता है। हकलाहट आपके मानसिक परिस्थिति, आत्मविश्वास, दूसरों के प्रतिक्रिया, जीवन की परिस्थितियाँ, आपके डर, आपके भावनाओं, इत्यादि के अनुसार बदलती रहती है। हकलाहट कोई बीमारी या शारीरिक असुविधा नही है। इस लिए उसको ठीक करने के लिए कोई दवाई या ऑपरेशन काम नही करेगी। आपके बोली के अंगों मे कोई विकलता नही है। इस का प्रमाण यह है कि अकेले मे बात करते समय आप अच्छा बोल पाते है या गाना गाते वक्त आप सही बोल पाते है।

हकलाहट एक मानसिक बुरी आदत है और इस बुरी आदत को भी आसानी से ठीक किया जा सकता है।


हकलाहट के कारण

हकलाहट ज़्यादातर छोटे उमर मे शुरु होती है पर वह जन्म से नही होती है। हकलाहट कई कारणों से हो सकती है|

  • बचपन मे किसी हकलाने वाले व्यक्ति का नकल करना|
  • किसी गंभीर बीमारी के बाद|
  • स्कूल के शुरुआती दिनों मे असुरक्षित महसूस करना|
  • काफ़ी कठोर अभिभावक होना|
  • अचानक से मानसिक या शारीरिक सदमा पहुँचना|
  • बचपन से शर्मिले स्वभाव का होना|
  • बहुत तेज़ी से बोलने की आदत होना|
  • माता-पिता मे अच्छे संबन्ध न होना|
  • परिवार मे लडाई-झगडे होना|
  • अगर सोचने की प्रक्रिया बहुत तेज़ हो|
  • सोचने और बोलने मे असमंवय न हो|
  • जीवन के हर कार्य-क्षेत्र मे अत्यधिक प्रतिस्पर्धा होना|
  • यदि कोई व्यक्ति को कई भाषाएँ बोलनी या सुननी पडे|
  • कडी दवाइयों के दुष्प्रभाव से|
  • बचपन मे अत्यधिक डर या तनाव से|
  • यदि बच्चे को घर मे बिना माता-पिता या जान-पहचान के लोगों के साथ अकेले छोड दिया जाए|
  • जब परिवार मे दूसरे बच्चे का जन्म हो|
  • असल ज़िन्दगी मे या फ़िल्मों मे डरावने चीज़ें देखकर डर जाना|
  • यदि बच्चा अस्वस्थ या कमज़ोर हो|
  • माता-पिता द्वारा हमेशा अच्छा करने का दबाव होना|
  • टान्सिल के ऑपरेशन के बाद|
  • यदि बाएँ हाथ से काम करने वाले व्यक्ति को दाहिने हाथ से काम करने के लिए मजबूर किया जाए|
  • दूसरों का ध्यान अपने ऊपर आकर्षित करने के लिए हकलाना|
  • यदि शिक्षक बहुत कडा हो और सज़ा देता हो|
  • यदि दोस्तों और सहपाठकों के सामने अपमानित महसूस करें|
  • यदि कोई हर छोटी छोटी बात पर डर जाता हो|
  • अगर किसी हादसे मे सर पर चोट लगे|
  • यदि माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य बहुत तेज़ी से बात करते हो या फ़िर हकलाते हो|

हकलाने की शुरूआत चाहे किसी भी वजह से हो, पर अब उसकी असली वजह है अनियंत्रित डर, घबराहट, झिझक, उत्तेजना, तनाव, बोलने के लिए साहस और आत्म-विश्वास की कमी।


 

हकलाहट कैसे शुरु होती है?

ज़्यादातर समय हकलाहट बचपन मे 3-10 साल की उमर से शुरु होती है। यह न तो कोई शारीरिक विकलांग होती है और न ही कोई बीमारी है। यह दूसरे असुविधाओं की तरह शुरु-शुरु मे मामूली होती है और बाद मे कुछ कारणों की वजह से एक बडी समस्या बन जाती है। एक बच्चा जब थोडी सी हकलाकर बात करता है तो उसके परिवारवाले और अन्य लोग उस बच्चे का ध्यान इस असुविधा की ओर आकर्षित करते है। क्योंकि वह सिर्फ़ एक बच्चा है, वह इस असुविधा के बारे मे सचेत हो जाता है और बात और भी बिगड जाती है। चारों ओर से विभिन्न तरह के उपदेश व सलाह पाकर बच्चा हक्का बक्का रह जाता है।

अगर माता-पिता इस असुविधा से ज़्यादा उदास हो या चिन्तित हो तो बच्चा अपने आप को दोष देने लगता है और खुद को असहाय महसूस करने लगता है। अगर उसके सामने इस असुविधा के बारे मे आलोचना होती हो तो उसे और भी ठेस पहुँचती है। धीरे-धीरे वह अपना आत्मविश्वास खोने लगता है और इस परेशानी को छिपाने की कोशिश मे उसकी सोच तथा बोली मे सामंजस नही रह पाता है और वह ज़्यादा हकलाने लगता है। इससे डर, घबराहट, तनाव, झिझक, हकलाहट की प्रत्याशा, खुद के प्रति हीन भावना, इत्यादि नकारात्मक सोच उत्पन्न होती है।

इस पूरे प्रक्रिया के वजह से वह मासूम बच्चा अपनी सारी ज़िन्दगी हकलाहट के लिए पहचाना जाता है और चिढाया जाता है। इससे वह बच्चा मायूस और दब्बू बन कर रह जाता है। वह बहुत कुछ बोलना चाहता है पर हकलाहट की वजह से बोल नही पाता है, जिससे वह और भी निराश हो जाता है।

जो चीज़ें बचपन मे शुरु होती है, वे आजीवन रह जाती है। पर आशा की किरण अभी भी बाकि है। हकलाहट का उपचार हर उमर के लिए संभव है।


परिस्थितियाँ जिन मे हकलाहट ज़्यादा होती है

  • अपना नाम बोलने मे|
  • अचानक पूछे गए प्रश्न का जवाब देने मे|
  • अपरिचित लोगों से बातचीत करने मे|
  • स्कूल या कॉलेज मे उत्तर देने मे, खास कर के हाज़िरी देने मे|
  • परीक्षा के समय अत्यंत डर और तनाव मे|
  • मौखिक परीक्षा मे|
  • अपने से बडे या ऊँचे पद के लोगों से बात करने मे|
  • इंटरव्यू मे|
  • तनाव व उत्तेजना के समय|
  • टेलीफोन पर|
  • टिकट खरीदते वक्त|
  • रेलवे स्टेशन या बस स्टैन्ड मे पूछताछ खिडकी पर|
  • आपातकालीन परिस्थियों मे|
  • बीमारी या थकावट के समय|
  • सामाजिक जन समूह मे|
  • उन लोगों के सामने जो आपको तंग करते हो या अपमानित करते हो|
  • किसी के साथ झगडा और विवाद करते वक्त|
  • यदि कोई आप पर आरोप लगा रहा हो|
  • किसी घटना को विस्तार मे बतलाने मे|
  • बहुत खुशी, बहुत उत्तेजना या भावुकता के समय मे|
  • घर या दफ़्तर मे ज़्यादा ज़िम्मेदारी आ जाने पर|
  • आत्मविश्वास की कमी होने पर|
  • नए और अंजान वातावरन मे|
  • कुछ विशेष या महत्वपूर्ण लोगों के सामने|
  • ज़्यादा निराश होने पर या चिढ जाने पर|
  • ग्रूप डिस्कशन के दौरान|
  • बार-बार विफल होने पर|
  • बहुत तेज़ी से बात करने पर|
  • कुछ खास अक्षरों या शब्दों के साथ||
  • दौड या व्यायाम करने के बाद बोलते वक्त|


परिस्थितियाँ जिन मे हकलाहट कम होती है

  • जब आपका मन प्रसन्न हो और आराम से हो|
  • कोई विशेष उपलब्धी होने पर जैसे कि अच्छे परिणाम मिलने पर या कोई पुरस्कार पाने पर|
  • अपने से अधीन लोगों के साथ या निचले ओहदे के लोगों के साथ|
  • उन लोगों के साथ जो सहानुभूतिपूर्वक हो या आपसे प्यार करते हो|
  • दोस्तों, परिवारवालों और छोटे बच्चों के साथ|
  • जीवन मे अच्छा समय होने पर|
  • यदि माता-पिता बोली के संबंध मे सही मार्ग-दर्शन देते है|
  • यदि सामनेवाला बहुत संकोची और दब्बू हो|


हकलाहट से आनेवाली मुशकिलें

  • ज़्यादा जानने के बावजूद भी आप खुद को व्यक्त नही कर पाते है जिससे लोग आपको अक्षम मानने लगते है|
  • तनावपूर्ण परिस्थितियों मे खुद पर काबू न रख पाने से आप सही फ़ैसले नही ले पाते है|
  • हकलाहट की वजह से मौखिक परीक्षा मे आपको कम अंक मिलते है क्योंकि परीक्षक के पास धैर्य नही रहता है कि वह आपकी पूरी बात सुनें|
  • ज़्यादातर आपको आपनी कडी महनत का उपयुक्त फल या प्रशंसा नही मिलता है|
  • हमेशा परेशानियों का सामना करने के वजह से आप अपने सुनहरे भविष्य के बारे मे सोच ही नही सकते है|
  • आप अगर सेल्स और मार्केटिंग के क्षेत्र मे है, तो आपको बहुत परेशानियों का सामना करना पडता है|
  • आप हमेशा उदास और मायूस रहते है|
  • आपके हकलाहट के वजह से आपको उचित आदर व सम्मान नही मिल पाता है|
  • समूह मे जब आप लोगों से बात नही करते है तो लोग आपको अभिमानी समझकर आप से बात नही करते है|
  • कहीं जाने के लिए या दूसरो से मिलने के लिए आपको दूसरे लोगों का सहारा लेना पडता है|
  • यदि लोग कुछ न बोलें तब भी आप खुद को हीन महसूस करते है|
  • स्कूल या कॉलेज मे दाखिला लेने मे आपको काफ़ी दिक्कतें होती है|
  • अपने विचारों को आप स्पष्ट रूप से व्यक्त नही कर पाते है|
  • आप पर कोई गलत इल्ज़ाम लगा रहा हो तो आप उत्तेजित हो जाते है और खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए ठीक तरह से दलीलें नही दे पाते है|
  • हकलाहट से उत्पन्न होनेवाली तनाव से आपके स्वास्थ पर बुरा असर पडता है|
  • धीरे-धीरे आपका खुद पर से यकीन उठ जाता है|
  • ज़्यादा योग्यता व कुशलता होने के बावजूद आपकी हकलाहट के वजह से आपको कम दर्जे के नौकरी व काम से ही संतुष्ट होना पडता है|
  • आप अपने जीवन के कई अनमोल अनुभवों और मौकों से वंचित रहते है|
  • शादी करने के लिए आपको बहुत मुशकिलें उठानी पडती है|
  • लोग हर जगह आपका मज़ाक उडाते है|
  • अच्छी योग्यता होने के बावजूद आपकी तरक्की नही होती है|
  • नेत्रत्व करने मे या मुख्य भाग निभाने के मौकों से आप हकलाहाट के वजह से चूक जाते है|
  • अपने बच्चो को खुद के वजह से हकलाते हुए देख कर आप और भी निराश होते है|

चाहे कैसी भी हकलाहट की परेशानी का सामना आप कर रहे हो, इस कोर्स को करने के बाद दुनिया की कोई भी ताकत आपको हकलाहट-रहित होने से नही रोक सकती है।


हकलानेवाले लोगों का मान

हकलानेवाले लोगों का समाज मे स्थान बहुत ही दुःख और पीडा की बात है। उनका मज़ाक उडाया जाता है, उनको चिढाया जाता, उन पर हँसी-मज़ाक किया जाता है, उन्हे समाज से बाहर समझा जाता है, उन से बुरा व्यवहार किया जाता है, उन से ठीक तरीके से बात नही किया जाता है, उन्हे “विकलांग” समझा जाता है, उनको पद मे नीचा समझा जाता है और उन्हे नज़र-अन्दाज़ भी किया जाता है| कई बार तो उनका शोषण भी किया जाता है। क्योंकि वे अपने या दूसरों पर हो रहे अपराध का विरोध नही कर पाते है, लोग उनका गलत फाइदा उठाने की कोशिश करते है। उन्हे बुद्धू, अक्षम व दब्बू समझा जाता है।

उनके अपने परिवार वाले उन्हे अपनाने से मना कर देते है और उनसे अपने रिश्ते तक को छिपाने की कोशिश करते है ताकि लोगों को इस बात का पता न चले कि उनके परिवार मे कोई हकलाता है। समाज मे, परिवार मे, दोस्तों मे, दफ्तर मे, अपना स्थान खोकर वह खुद की नज़रो मे गिर जाते है। वह खुद को विकलांग व अक्षम मानने लगते है और अपने आप को अच्छे जीवन के योग्य नही समझते है। परिणामत: हकलाहट से ग्रस्त लोग एक स्वाभाविक, सफल व सम्पूर्ण जीवन से वंचित रहते है।

हर तरह से स्क्ष्म व गुणी होने के बावजूद सिर्फ़ इस समस्या के वजह से वे जीवन मे आगे नही बढ पाते है और सफलता से हर बार चूक जाते है।


क्या हकलाहट जन्म से होती है?

हकलाहट ज़्यादातर बचपन से होती है। एक बच्चा पहले आवाज़ो को सुनकर उसे समझकर उसका उपयुक्त प्रतिक्रिया सीखता है। इसके लिए वह दूसरों के बोलने के ढंग व प्रतिक्रिया की नकल करते है। धीरे-धीरे आवाज़ो से शब्द बनते है और शब्दों से वाक्य। अगर माता, पिता, भाई, बहन और अन्य परिवारवालें हकलाते हुए बोले तो नकल करके सीखते वक्त, बच्चे उस गलत बोलने के तरीके को ही सीखते है क्योंकि उन्हे सही या गलत का फ़र्क मालूम नही है। इस माध्यम से सीखा हुआ हकलाहट कभी-कभी पीडी दर पीडी चली आती है, जिससे लोग सोचते है कि हकलाहट जन्म से होती है।

कुछ लोगों का अटूट विश्वास है कि हकलाहट जन्म से होता है| वे अपने आपको निराश और असहाय महसूस करते है यह सोचकर कि उनके समस्या का हल नामुमकिन है और उन्हे इस श्राप को आजीवन झेलना होगा। कुछ लोग तो यह भी मानते है कि भगवान की नाराज़गी या उनके बुरे कर्मों व पापों का नतीजा वे ऐसे भुगत रहे है। पर असल बात तो ये है कि लोगों को सही जानकारी नही है और ऊपर से इस विषय पर किताबें व विशेषज्ञों की भारी कमी है। लोगों के हज़ारो नुस्खों और सलाहों के विफलता से आप अपनी आशा और हौसला खोकर अपनी हकलाहट-ग्रस्त ज़िदंगी का ज़हर पी रहे है। पर अगर इन टोटकों से हकलाहट का इलाज होता तो हकलाहट-ग्रस्त लोगों के भविष्य इतनी अंधकारमय नही होती। दूसरों के गलत जानकारी से बचें और हम से सही जानकारी के लिए संपर्क करें।

हकलाहट न तो कोई बीमारी है और न ही जन्म से होती है। यह एक मानसिक बुरी आदत है जिसका उपचार आसानी से किया जा सकता है।


क्या हकलाहट अपने आप ठीक हो सकती है?

ज़्यादा तर विशेषज्ञ हकलाहट के समस्या के लिए यह सलाह देते है कि वह अपने आप ठीक हो जाएगा। उस शुभ घडी का इन्तेज़ार करते करते सारी ज़िन्दगी गुज़र सकती है और वह पल नही भी आ सकता है। ऐसा नही है कि हकलाहट कभी भी अपने आप ठीक नही हो सकती है, पर ऐसा होने की संभावना न के बराबर है| अगर 10-20 साल बाद हकलाहट ठीक हो भी जाती है तो आप उन सालों को तो वापस नही ला सकते है, जो हकलाहट के वजह से आपने गवाँ दिए है। वह वक्त कभी भी लौट नही सकता है जो आपके लिए अनगिनत अच्छी यादे होने चाहिए न कि कोई डरावना सपना।

बढती उमर मे अगर आप जीवन ही न जी पाए तो आगे जाकर पछतावे के अलावा आपके पास और कुछ नही बचेगा। इस लिए मेरा यह मानना है कि हम अपना जीवन खुद जी सकते है और अपना भविष्य खुद बना सकते है। इस लिए देर न करें और जल्द ही हकलाहट का उपचार कराएँ। उस “शुभ घडी” का इन्तेज़ार करते हुए सारी उमर न बिता दे| उस पल को अभी बनाएँ और अपने हकलाहट से मुक्ति पा लें। यह समस्या जितने ज़्यादा समय रहेगी उतनी ही उसकी जडें आपके मन मे मज़बूत होती जाएँगी और आपकी हकलाहट और भी जटिल हो जाएगी|

आपके बच्चे को अगर 3 महीनों से ज़्यादा समय से हो रही हकलाहट का तुरंत इलाज कराये।


अच्छे वक्ता होने की अहमियत

ज़िन्दगी मे कामयाबी हासिल करने के लिए अच्छी तरह से बोलना अत्यंत आवश्यक है, चाहे आप छात्र हो, नौकरी की तलाश कर रहे हो या फिर नौकरी कर रहे हो। आप जितना भी पढें-लिखें या ज्ञानी हो आपके ज्ञान को व्यक्त करने के लिए आपको एक अच्छा वक्ता होना ही होगा, वरना आपका ज्ञान धरा का धरा ही रह जाएगा। अगर आप देखें तो इतिहास के ज़्यादातर कामयाब हस्ती अपनी सोच को अच्छी तरह से व्यक्त कर पाने के वजह से ही इतना मशहूर बन पाए है। आज के ज़माने मे भी आप क्या और कैसे बोलते है वह महत्व रखता है। अभिभावक अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए उन्हे पढाते व लिखाते है, उनकी हर ज़रूरत को पूरा करते है, पर कभी आपने यह सोचा है कि उनके हकलाहट के वजह से सब व्यर्थ हो सकता है। न सिर्फ़ यह आपके व्यक्तित्व को सँवारती है, बल्कि ये दूसरों पर आपके प्रभाव को निखारती भी है। अपने हकलाहट को अपने सफलता के बीच मे न आने दें।

इसी लिए तुरंत हकलाहट का इलाज करवाएँ और अपने बच्चों का भविष्य बरबाद होने से बचा लें। हर उमर के हकलाहट का इलाज संभव है सिर्फ़ स्टैमरिन्ग क्योर सेन्टरTM मे।

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